रविवार, जून 05, 2005

एक कविता का अनुवाद

श्री जयमिन पटेल द्वारा ई-मेल में प्राप्त एक अनुरोध के फ़लस्वरूप, पहली बार किसी एक कविता के हिन्दी अनुवाद का अवसर मिला । आप सभी के समक्ष इस अनुवाद को प्रस्तुत कर रहा हूँ । आशा करता हूँ कि हिन्दी अनुवाद में कविता का मूल भाव प्रकट हो रहा है ।

गुलाब होते है लाल,
बनफ़शे होते है बैगनी ।
अपनी पहचान को बदल सकता हूँ मै कभी भी
तुम्हें प्यार करते रहने को बदल सकता हूँ, कभी नहीं ॥


"Roses are red
Violets are Blue
I can change my culture
But i can never change loving you."


दिनांक १२।६।२००५ को जोड़ा :
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एक बार फ़िर, श्रीमती जी ने फ़िर सिद्ध कर दिया कि वे "श्री" + "मति" दोनों की स्वामिनी है और यदि अंग्रेजी में कहा जाएँ तो "Better Half" । उन्होनें इसी कविता का अपनी काव्यात्मक शैली और अपने परा-स्नातक हिन्दी ज्ञान का उपयोग करके इस प्रकार किया :

लाल होते है गुलाब, नीले बनफ़ूल ।
खुद को बदल सकता हूँ, पर
तुम्हें ना-चाहने की, कर नहीं सकता हूँ भूल ॥